http://feeds.feedburner.com/blogspot/GKoTZ
Showing posts with label Hanuman Chalisa. Show all posts
Showing posts with label Hanuman Chalisa. Show all posts

26.6.16

रामजी से राम राम कहिए// Ram ji se ram ram kahiyo //हनुमान चालीसा



रामजी से राम राम कहिए,
 ram ji se ram ram kahiyo,
हनुमान चालीसा


दोहा
श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि। बरनउँ रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार।।
चौपाई
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥१॥


राम दूत अतुलित बल धामा
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥२॥


महाबीर बिक्रम बजरंगी
कुमति निवार सुमति के संगी॥३॥


कंचन बरन बिराज सुबेसा
कानन कुंडल कुँचित केसा॥४॥


हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे
काँधे मूँज जनेऊ साजे॥५॥


शंकर सुवन केसरी नंदन
तेज प्रताप महा जगवंदन॥६॥


विद्यावान गुनी अति चातुर
राम काज करिबे को आतुर॥७॥


प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया
राम लखन सीता मन बसिया॥८॥


सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा
विकट रूप धरि लंक जरावा॥९॥


भीम रूप धरि असुर सँहारे
रामचंद्र के काज सँवारे॥१०॥


लाय संजीवन लखन जियाए
श्रीरघुबीर हरषि उर लाए॥११॥


रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥१२॥


सहस बदन तुम्हरो जस गावै
अस कहि श्रीपति कंठ लगावै॥१३॥


सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा
नारद सारद सहित अहीसा॥१४॥


जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते
कवि कोविद कहि सके कहाँ ते॥१५॥


तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा
राम मिलाय राज पद दीन्हा॥१६॥


तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना
लंकेश्वर भये सब जग जाना॥१७॥


जुग सहस्त्र जोजन पर भानू
लिल्यो ताहि मधुर फ़ल जानू॥१८॥


प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं
जलधि लाँघि गए अचरज नाहीं॥१९॥


दुर्गम काज जगत के जेते
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥२०॥


राम दुआरे तुम रखवारे
होत ना आज्ञा बिनु पैसारे॥२१॥


सब सुख लहैं तुम्हारी सरना
तुम रक्षक काहु को डरना॥२२॥


आपन तेज सम्हारो आपै
तीनों लोक हाँक तै कापै॥२३॥


भूत पिशाच निकट नहिं आवै
महावीर जब नाम सुनावै॥२४॥


नासै रोग हरे सब पीरा
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥२५॥


संकट तै हनुमान छुडावै
मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥२६॥


सब पर राम तपस्वी राजा
तिन के काज सकल तुम साजा॥२७॥


और मनोरथ जो कोई लावै
सोई अमित जीवन फल पावै॥२८॥


चारों जुग परताप तुम्हारा
है परसिद्ध जगत उजियारा॥२९॥


साधु संत के तुम रखवारे
असुर निकंदन राम दुलारे॥३०॥


अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता
अस बर दीन जानकी माता॥३१॥


राम रसायन तुम्हरे पासा
सदा रहो रघुपति के दासा॥३२॥


तुम्हरे भजन राम को पावै
जनम जनम के दुख बिसरावै॥३३॥


अंतकाल रघुवरपुर जाई
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥३४॥


और देवता चित्त ना धरई
हनुमत सेई सर्व सुख करई॥३५॥


संकट कटै मिटै सब पीरा
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥३६॥


जै जै जै हनुमान गोसाई
कृपा करहु गुरु देव की नाई॥३७॥


जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहिं बंदि महा सुख होई॥३८॥


जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥३९॥


तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय मह डेरा॥४०॥


दोहा
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥






3.4.16

हनुमान चालीसा Hanuman Chalisa



दोहा॥




श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।      (इस लिंक को क्लिक कर यू ट्यूब  मे सुनें)

बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥


बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार ।

बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥


॥चौपाई॥


जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥


राम दूत अतुलित बल धामा ।

अञ्जनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥२॥


महाबीर बिक्रम बजरङ्गी ।

कुमति निवार सुमति के सङ्गी ॥३॥


कञ्चन बरन बिराज सुबेसा ।

कानन कुण्डल कुञ्चित केसा ॥४॥


हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै ।

काँधे मूँज जनेउ साजै ॥५॥


सङ्कर सुवन केसरीनन्दन ।

तेज प्रताप महा जग बन्दन ॥६॥

बिद्यावान गुनी अति चातुर ।

राम काज करिबे को आतुर ॥७॥

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।

राम लखन सीता मन बसिया ॥८॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।

बिकट रूप धरि लङ्क जरावा ॥९॥

भीम रूप धरि असुर सँहारे ।

रामचन्द्र के काज सँवारे ॥१०॥


लाय सञ्जीवन लखन जियाये ।

श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ॥११॥




रघुपति कीह्नी बहुत बड़ाई ।

तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥१२॥

सहस बदन तुह्मारो जस गावैं ।

अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥१३॥

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।

नारद सारद सहित अहीसा ॥१४॥

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते ।

कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥१५॥

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीह्ना ।

राम मिलाय राज पद दीह्ना ॥१६॥

तुह्मरो मन्त्र बिभीषन माना ।

लङ्केस्वर भए सब जग जाना ॥१७॥

जुग सहस्र जोजन पर भानु ।

लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥१८॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।

जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥१९॥

दुर्गम काज जगत के जेते ।

सुगम अनुग्रह तुह्मरे तेते ॥२०॥

राम दुआरे तुम रखवारे ।

होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥२१॥




सब सुख लहै तुह्मारी सरना ।

तुम रच्छक काहू को डर ना ॥२२॥

आपन तेज सह्मारो आपै ।

तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥२३॥

भूत पिसाच निकट नहिं आवै ।

महाबीर जब नाम सुनावै ॥२४॥




नासै रोग हरै सब पीरा ।

जपत निरन्तर हनुमत बीरा ॥२५॥




सङ्कट तें हनुमान छुड़ावै ।

मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥२६॥




सब पर राम तपस्वी राजा ।

तिन के काज सकल तुम साजा ॥२७॥

और मनोरथ जो कोई लावै ।

सोई अमित जीवन फल पावै ॥२८॥

चारों जुग परताप तुह्मारा ।

है परसिद्ध जगत उजियारा ॥२९॥

साधु सन्त के तुम रखवारे ।

असुर निकन्दन राम दुलारे ॥३०॥

अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता ।
अस बर दीन जानकी माता ॥३१॥
राम रसायन तुह्मरे पासा ।
सदा रहो रघुपति के दासा ॥३२॥

तुह्मरे भजन राम को पावै ।

जनम जनम के दुख बिसरावै ॥३३॥

अन्त काल रघुबर पुर जाई ।

जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥३४॥




और देवता चित्त न धरई ।

हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥३५॥
सङ्कट कटै मिटै सब पीरा ।

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥३६॥

जय जय जय हनुमान गोसाईं ।

कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥३७॥

जो सत बार पाठ कर कोई ।

छूटहि बन्दि महा सुख होई ॥३८॥

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा ।

होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥३९॥

तुलसीदास सदा हरि चेरा ।

कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥४०॥

॥दोहा॥

पवनतनय सङ्कट हरन मङ्गल मूरति रूप ।

राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप ॥

चिकित्सा आलेख-

पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा  का  अचूक  इलाज 

*किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार*

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका  के अचूक उपचार 

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि


पित्त पथरी (gallstone)  की अचूक औषधि