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नाथ ! कैसे नरसिंह रूप बनाया!


 भजन: नाथ ! कैसे नरसिंह रूप बनाया!

राग: बरहंस ताल धमाल


नाथ ! कैसे नरसिंह रूप बनाया!
जासे भक्त प्रह्लाद बचाया ।।टेक।।

न कोई तुम्हरा पिता कहावे, न कोई जननी जाया
थंभ फोड़कर प्रकट भये हरि, यह अचरज तेरी माया ।।१।।

आधा रूप धरा प्रभु नर का, आधा सिंह सुहाया
हिरण्यकशिपु को पकड़ धरण में, नख से फाड़ गिराया ।।२।।

गर्जन सुनकर देवलोक से, ब्रह्मादिक सब आया
हाथ जोड़ कर विनती कीनी, शांत स्वरूप कराया ।।३।।

अन्तर्यामी सर्वव्यापक, ईश्वर वेद बताया
ब्रह्मानंद सत्यकर सबको, यह परमाण दिखाया ।।४।।

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