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16.10.16

रामायण के चौपाई -मंत्र Ramayan Chopai mantra



रामायण की चौपाई से जीवन के कुछ महत्वपूर्ण मंत्र ! यदि आप इन मंत्रो का अपने जीवन मे प्रयोग करेंगे तो प्रभु श्री राम आप के जीवन को सुखमय बना देगे !!

रक्षा के लिए
मामभिरक्षक रघुकुल नायक ! घृत वर चाप रुचिर कर सायक !!

विपत्ति दूर करने के लिए
राजिव नयन धरे धनु सायक ! भक्त विपत्ति भंजन सुखदायक !!

सहायता के लिए
मोरे हित हरि सम नहि कोऊ ! एहि अवसर सहाय सोई होऊ !!
सब काम बनाने के लिए
वंदौ बाल रुप सोई रामू ! सब सिधि सुलभ जपत जोहि नामू !!
वश मे करने के लिए
सुमिर पवन सुत पावन नामू ! अपने वश कर राखे राम !!
संकट से बचने के लिए
दीन दयालु विरद संभारी ! हरहु नाथ मम संकट भारी !!
विघ्न विनाश के लिए
सकल विघ्न व्यापहि नहि तेही ! राम सुकृपा बिलोकहि जेहि !
रोग विनाश के लिए
राम कृपा नाशहि सव रोगा ! जो यहि भाँति बनहि संयोगा !!
ज्वर ताप दूर करने के लिए
 दैहिक दैविक भोतिक तापा ! राम राज्य नहि काहुहि व्यापा !!
दुःख नाश के लिए 
राम भक्ति मणि उस बस जाके ! दुःख लवलेस न सपनेहु ताके !!
खोई चीज पाने के लिए 


गई बहोरि गरीब नेवाजू ! सरल सबल साहिब रघुराजू !!
अनुराग बढाने के लिए 
सीता राम चरण रत मोरे ! अनुदिन बढे अनुग्रह तोरे !!
घर मे सुख लाने के लिए
 जै सकाम नर सुनहि जे गावहि ! सुख सम्पत्ति नाना विधि पावहिं !!
सुधार करने के लिए
मोहि सुधारहि सोई सब भाँती ! जासु कृपा नहि कृपा अघाती ! 
विद्या पाने के लिए
गुरू गृह पढन गए रघुराई ! अल्प काल विधा सब आई !!
सरस्वती निवास के लिए
जेहि पर कृपा करहि जन जानी ! कवि उर अजिर नचावहि बानी !!
निर्मल बुध्दि के लिए
ताके युग पदं कमल मनाऊँ ! जासु कृपा निर्मल मति पाऊँ !!
मोह नाश के लिए
होय विवेक मोह भ्रम भागा ! तब रघुनाथ चरण अनुरागा !!
प्रेम बढाने के लिए
सब नर करहिं परस्पर प्रीती ! चलत स्वधर्म कीरत श्रुति रीती !!
प्रीती बढाने के लिए
बैर न कर काह सन कोई ! जासन बैर प्रीति कर सोई !!
सुख प्रप्ति के लिए
अनुजन संयुत भोजन करही ! देखि सकल जननी सुख भरहीं !!
भाई का प्रेम पाने के लिए
सेवाहि सानुकूल सब भाई ! राम चरण रति अति अधिकाई !!
बैर दूर करने के लिए
 बैर न कर काहू सन कोई ! राम प्रताप विषमता खोई !!
मेल कराने के लिए 


गरल सुधा रिपु करही मिलाई ! गोपद सिंधु अनल सितलाई !!
शत्रु नाश के लिए
जाके सुमिरन ते रिपु नासा ! नाम शत्रुघ्न वेद प्रकाशा !!
रोजगार पाने के लिए
विश्व भरण पोषण करि जोई ! ताकर नाम भरत अस होई !!
 इच्छा पूरी करने के लिए
राम सदा सेवक रूचि राखी ! वेद पुराण साधु सुर साखी !!
पाप विनाश के लिए
पापी जाकर नाम सुमिरहीं ! अति अपार भव भवसागर तरहीं !!
अल्प मृत्यु न होने के लिए
अल्प मृत्यु नहि कबजिहूँ पीरा ! सब सुन्दर सब निरूज शरीरा !!
दरिद्रता दूर के लिए 
नहि दरिद्र कोऊ दुःखी न दीना ! नहि कोऊ अबुध न लक्षण हीना !!
प्रभु दर्शन पाने के लिए
अतिशय प्रीति देख रघुवीरा ! प्रकटे ह्रदय हरण भव पीरा !!
शोक दूर करने के लिए
नयन बन्त रघुपतहिं बिलोकी ! आए जन्म फल होहिं विशोकी !!
क्षमा माँगने के लिए
अनुचित बहुत कहहूँ अज्ञाता ! क्षमहुँ क्षमा मन्दिर दोऊ भ्राता !