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Thursday, September 22, 2016

अँखियाँ हरी दरसन की प्यासी Surdas Bhajan "Akhiya Haridarasan Ki Pyasi" by MAHALAXMI SHENOY

अँखियाँ हरी दरसन की प्यासी
 Surdas Bhajan 
Akhiya Haridarasan Ki Pyasi
by MAHALAXMI SHENOY


अखियाँ हरी दर्शन की प्यासी |

देखियो चाहत कमल नैन को, निसदिन रहेत उदासी |

आये उधो फिरी गए आँगन, दारी गए गर फँसी |

केसर तिलक मोतीयन की माला, ब्रिन्दावन को वासी |

काहू के मन की कोवु न जाने, लोगन के मन हासी |

सूरदास प्रभु तुम्हारे दरस बिन, लेहो करवट कासी |

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