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12.8.16

मो को कहां ढूढे बंदे मै तो तेरे पास में-kabir bhajan

कबीर भजन 
Kabir Bhajan 

मो को कहां ढूढे बंदे मै तो तेरे पास में

ना तीरथ में ना मूरत में ना एकांत निवास में

ना मंदिर मे ना मस्जिद में ना काबा कैलाश में

ना मैं जप में ना मैं तप में ,ना मैं व्रत-उपवास में।

ना ही क्रिया करम में रहता ना रहता सन्यास में

नाहिं प्राण में,नाहिं पिंड में ,ना ब्रह्मांड आकास में

ना मैं भृकुटि भंवर गुफ़ा में, सब श्वासन की श्वास में

कहत कबीर सुनो भई साधो मैं तो हूं विश्वास में।