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20.8.16

मैया मोहे मंगल दर्शन दीजै

मैया मोहे मंगल दर्शन दीजै
मैया मोहे मंगल दर्शन दीजै ॥

विमल तेजोमयी मधुर मूर्ति,
मनोगमा में निहारूं ।
ममता मन्दिर में माँ मेरी,
अपना मुझे कर लीजै ॥१॥


भले भाव भीतर सब जागें,
भक्ति भाव भर आवे ।
भारी भरोसा भगवति पाऊँ,
ऐसी करूणा कीजै ॥२॥

तेरा प्रेम बसे अंग अंग में,
तेरा राग अलापूं ।
वे मैं कर्म करूं जिस से तू,
मुझ पर मैया रीझै ॥३॥