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Saturday, August 20, 2016

राम, अब ऐसा वर मैं पाऊँ

राम, अब ऐसा वर मैं पाऊँ
राम, अब ऐसा वर मैं पाऊँ ॥
दया दान दो परम देव जी,
वरदा दृष्टि पसारो ।
देव द्वार का जिस से सदा मैं,
दासानुदास कहाऊँ ॥१॥
ध्रुव धारणा धारूं तुझ में,
आशा एक भरोसा ।
अचल चूल वत निश्चल निश्चय,
परा प्रीति उर लाऊँ ॥२॥
एक भक्ति हो भगवन तेरी,
दूसरा देव न देखूं ।
राम नाम में लगन लगा कर,
दुविधा दूर भगाऊँ ॥३॥

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