http://feeds.feedburner.com/blogspot/GKoTZ

Tuesday, August 2, 2016

बंसी की धुन सुन तेरे लिये चुन चुन




बंसी की धुन सुन तेरे लिये चुन चुन
लायि हूँ मैं बगिया से गोरी गोरी कलियाँ
निकली हूँ चुप चुप, घर से मैं लुक छुप
भोले सजन तेरे दिल की जलन
आयी हूँ सजाने बलम तेरी गलियाँ

मैं तो जान गयी, जान गयी, जान गयी रे
तेरी मीठी नज़र पहचान गयी रे
तेरी नज़र किसे ढूँढे इधर
मैं तो जान गयी, जान गयी, जान गयी रे
दुनिया से बच बच
कहती हूँ सच सच
तेरे कसम यह सूरतिया बलम मोहे
आयी हूँ ...

बाँकी पलक यह सलोनी झलक
मोहे मार गयी, मार गयी, मार गयी रे
मोहे मार गयी, मार गयी, मार गयी रे
आयी हूँ ...
मैं तो बैठे बिठाये जिया हार गयी रे
दिल मेरा पल पल
कहता था चल चल


No comments:

Post a Comment