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Friday, July 29, 2016

मन फ़ूला फ़ूला फ़िरे जगत में कैसा नाता रे -कबीर भजन

कबीर भजन 

मन फ़ूला फ़ूला फ़िरे जगत में कैसा नाता रे
माता कहे यह पुत्र हमारा,बहिन कहे बीर मेरा
भाई कहे यह भुजा हमारी,नारी कहे नर मेरा
पैर पकरि के माता रोवे,बांह पकरि के भाई
लपटि झपटि के तिरिया रोवै,हंस अकेला जाई
चारों कोना आग लगाई,फ़ूंक दिया जस होरी
हाड जरे जसलाकडी केस जरे जस घास
सोना जैसी काया जरि गई ,कोई न आया पास
कहत कबीर सुनो भई साधु एक नाम की आस।


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