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Tuesday, June 14, 2016

न मैं धन चाहूँ, न रतन चाहूँ






न मैं धन चाहूँ, न रतन चाहूँ---video link
तेरे चरणों की धूल मिल जाये
तो मैं तर जाऊँ, हाँ मैं तर जाऊँ
हे राम तर जाऊँ...


मोह मन मोहे, लोभ ललचाये
मैं तो मर जाऊँ, हाँ मैं मर जाऊँ
कैसे कैसे ये नाग लहराये
इससे पहले कि मन उधर जाये
हे राम मर जाऊँ


मेरे दिल ने ही जाल फैलाये
थम गया पानी, जम गयी कायी
बहती नदिया ही साफ़ कहलायी
अब किधर जाऊँ, मैं किधर जाऊँ \- २
शाम होते ही पंछी आ जाये
अब किधर जाऊँ, मैं किधर जाऊँ...


लाये क्या थे जो लेके जाना है
नेक दिल ही तेरा खज़ाना है
अब तो घर जाऊँ अपने घर जाऊँ
अब तो घर जाऊँ अपने घर जाऊँ...

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