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Thursday, June 2, 2016

हर सांस में हर बोल में




हर सांस में हर बोल में
हर सांस में हर बोल में हरि नाम की झंकार है .
हर नर मुझे भगवान है हर द्वार मंदिर द्वार है ..


ये तन रतन जैसा नहीं मन पाप का भण्डार है .
पंछी बसेरे सा लगे मुझको सकल संसार है ..




हर डाल में हर पात में जिस नाम की झंकार है .
उस नाथ के द्वारे तू जा होगा वहीं निस्तार है ..


अपने पराये बन्धुओं का झूठ का व्यवहार है .
मनके यहां बिखरे हुये प्रभु ने पिरोया तार है ..

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