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26.4.16

ज्योत से ज्योत जगाते चलो Jyot Se Jyot Jagate Chalo - Sant Gyaneshwar 1964

ज्योत से ज्योत जगाते चलो
 Jyot Se Jyot Jagate Chalo
संत ज्ञानेश्वर
            भजन 
ज्योत से ज्योत जलाते चलो
प्रेम की गंगा बहाते चलो
राह में आये जो दीन दुखी
सब को गले से लगते चलो

जिसका ना कोई संगी साथी
इश्वर है रखवाला
जो निर्धन है जो निर्बल है
वो है प्रभु का प्यारा
प्यार के मोती लूटते चलो
ज्योत से...

आशा टूटी, ममता रूठी
छूट गया है किनारा
बंद करो मत द्वार दया का
दे दे कुछ तो सहारा
दीप दया का जलाते चलो
ज्योत से...

छाया है चारों और अँधेरा
भटक गयी है दिशाएं
मानव बन बैठा दानव
किसको व्यथा सुनाएँ
धरती को स्वर्ग बनाते चलो
ज्योत से...

कौन है ऊँचा कौन है नीचा
सब में वो ही समाया
भेद-भाव के झूठे भरम में
ये मानव भरमाया
धरम ध्वजा फहराते चलो
 


प्रेम की गंगा...

सारे जगत के कण-कण में है
दिव्य अमरएक आत्मा
एक ब्रह्मा है ek सत्य है
एक ही है परमात्मा
प्राणों से प्राण मिलाते चलो
प्रेम की गंगा ...