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4.4.16

मन मोहना बड़े झूठे,

मन मोहना बड़े झूठे,
हार के हार नहीं माने |

बन के खिलाडी पिया,
निकले अनाड़ी |
मोसे बईमानी की,
मुझ से ही रूठे ||

तुम्हारी यह बंसी कहना,
बनी गल फंसी |
तान सूना के मेरा,
तन मन लूटे ||