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4.4.16

ॐ जय जगदीश हरे

ॐ जय जगदीश हरे स्वामी* जय जगदीश हरे
भक्त जनों के संकट,दास जनों के संकट,क्षण में दूर करे,
ॐ जय जगदीश हरे
जो ध्यावे फल पावे,दुख बिनसे मन का
स्वामी दुख बिनसे मन का
सुख सम्पति घर आवे,सुख सम्पति घर आवे,कष्ट मिटे तन का
ॐ जय जगदीश हरे
मात पिता तुम मेरे,शरण गहूं मैं किसकी
स्वामी शरण गहूं मैं किसकी .
तुम बिन और न दूजा,तुम बिन और न दूजा,आस करूं मैं जिसकी
ॐ जय जगदीश हरे



तुम पूरण परमात्मा,तुम अंतरयामी
स्वामी तुम अंतरयामी
पारब्रह्म परमेश्वर,पारब्रह्म परमेश्वर,तुम सब के स्वामी
ॐ जय जगदीश हरे
तुम करुणा के सागर,तुम पालनकर्तास्वामी तुम पालनकर्ता,
मैं मूरख खल कामी
मैं सेवक तुम स्वामी,कृपा करो भर्ता
ॐ जय जगदीश हरे
तुम हो एक अगोचर,सबके प्राणपति,
स्वामी सबके प्राणपति,
किस विधि मिलूं दयामय,किस विधि मिलूं दयामय,तुमको मैं कुमति
ॐ जय जगदीश हरे
दीनबंधु दुखहर्ता,ठाकुर तुम मेरे,
स्वामी ठाकुर तुम मेरे
अपने हाथ उठाओ,अपने शरण लगाओ
द्वार पड़ा तेरे
ॐ जय जगदीश हरे
विषय विकार मिटाओ,पाप हरो देवा,स्वामी पाप हरो देवा,.
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,संतन की सेवा
ॐ जय जगदीश हरे