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Tuesday, February 2, 2016

श्री राम चंद्र कृपालु भजमन

                 Ram Bhajan 

श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणम् |
नव कंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणम् ||
कंदर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरज सुन्दरम् |
पट पीत मानहु तड़ित रूचि शुचि नौमि जनक सुतावरम् ||

भज दीन बन्धु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम् |
रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम् ||
सिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदारु अंग विभूषणम् |
आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर - दूषणम् ||
इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम् |
मम हृदय कंज निवास कुरु कामादि खल दल गंजनम् ||

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