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20.8.15

श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन.,shri ramchandra kripalu bhajman

                 Ram bhajan 

श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणम्
नवकञ्ज लोचन कञ्ज मुख कर कञ्ज पद कञ्जारुणम्
कंदर्प अगणित अमित छबि नव नील नीरज सुन्दरम् ।
पटपीत मानहुं तड़ित रुचि सुचि नौमि जनक सुतावरम्
भजु दीन बन्धु दिनेश दानव दैत्यवंशनिकन्दनम् ।
रघुनन्द आनंदकंद कोशल चन्द दशरथ नन्दनम्
सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदार अङ्ग विभूषणम् ।
आजानुभुज सर चापधर सङ्ग्राम जित खरदूषणम्
इति वदति तुलसीदास शङ्कर शेष मुनि मनरञ्जनम् ।
मम हृदयकञ्ज निवास कुरु कामादिखलदलमञ्जनम्
मनु जाहीं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुन्दर साँवरो ।
करुना निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो ॥६॥

एही भांति गोरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषीं अली ।
तुलसी भवानिह पूजी पुनि-पुनि मुदित मन मंदिर चली