http://feeds.feedburner.com/blogspot/GKoTZ

Wednesday, December 8, 2010

ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैंजनिया Thumak chalat ramchandra

ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैंजनियां.....

किलकि किलकि उठत धाय गिरत भूमि लटपटाय
धाय मात गोद लेत दशरथ की रनियां.....

अंचल रज अंग झारि विविध भांति सो दुलारि
तन मन धन वारि वारि कहत मृदु बचनियां...

विद्रुम से अरुण अधर बोलत मुख मधुर मधुर
सुभग नासिका में चारु लटकत लटकनियां...

तुलसीदास अति अनंद देख के मुखारविंद
रघुवर छबि के समान रघुवर छबि बनियां...

ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैंजनियां।



5 comments:

  1. सुन्दर भजन ।शुभकामनाएं

    ReplyDelete
  2. "तू निर्दोष तुझे क्या डर है ,पग-पग पर साथी ईश्वर है" सो टका खरी बात है।

    ReplyDelete
  3. आपके ब्लॉग पर आकर अच्छा लगा. हिंदी लेखन को बढ़ावा देने के लिए आपका आभार. आपका ब्लॉग दिनोदिन उन्नति करे. आप यहाँ भी अवश्य पधारें, यदि हमारा प्रयास आपको पसंद आये तो "फालोवर" बनकर हमारा उत्साहवर्धन अवश्य करें. साथ ही अपने अमूल्य सुझावों से हमें अवगत भी कराएँ, ताकि इस मंच को हम नयी दिशा दे सकें. धन्यवाद . आपकी प्रतीक्षा में ....
    भारतीय ब्लॉग लेखक मंच
    डंके की चोट पर

    ReplyDelete
  4. आपको गोवर्धन व अन्नकूट पर्व की हार्दिक मंगल कामनाएं,

    ReplyDelete