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1.11.10

मीरा के भजन

हरो जन की पीर
meera bhajan 
हरी तुम हरो जन की पीर
द्रोपदी की लाज राखी चट बढायो चीर
भगत कारण रूप नर हरि धर्यो आप समीर
हिरणाकुश को मारि लीन्हो धर्यो नाहीं धीर
बूढतो गजराज राख्यो कियो बाहर नीर
दासी मीरा लाल गिरधर चरण कंवल सीर
मेरो दरद न जाणै कोय
हैरी मैं तो प्रेम-दीवाणी मेरो दरद न जाणै कोय
घायल की गति घायल जाणै जो कोई घायल होय
जोहरि की गति जोहरि जाणै की जिन जोहर होय
सूली ऊपर सेज हमारी किस बिधि सोवण होय
गगन मंडल पर सेज पिया की किस बिधि मिलणो होय
दरद की मारी बन-बन डोलूं   बैद  मिल्या नहीं कोय
मीरा की प्रभु पीर मिटे जब बैद सांवरिया होय॥
कोई कहियो रे
कोई कहियो रे प्रभु आवन की
आवन की मन भावन की
आप न आवै लिख नहीं भेजे
बाण पडी ललचावन की
ए दो नैणा कह्यो नहीं माने
नदियां बहै जैसे सावन की
कहा करूं कुछ नहिं बस मेरो
पांख नहीं उड जावन की
मीरा कहे प्रभु कबरे मिलोगे
चेरी मैं हूं तेरे दांवण की॥

  

तुम बिन नैण दुखारा Meera bhajan 
तुम बिन नैण दुखारा
म्हारे घर आ प्रीतम प्यारा
तन,मन,धन,सब भेंट करूंगी
भजन करूंगी तुम्हारा॥
म्हारे घर आ प्रीतम प्यारा
तुम गुणवंत सुसाहिब कहिये
मोमें अवगुण सारा॥
म्हारे घर आ प्रीतम प्यारा
मैं निगुणी कछु गुण नहीं जानू
 तुम सा बगसणहारा॥
म्हारे घर आ प्रीतम प्यारा
मीरा कहे प्रभु कबरे मिलोगे
तुम बिन नैण दुखारा
म्हारे घर आ प्रीतम प्यारा॥
आय मिलो मोहिं



राम मिलन के काज सखी  मीरा भजन 
राम मिलन के काज सखी मेरे आरती उर में जागी रे
तडफ़त-तडफ़त कल न परत है बिरह बाण उर लागी रे
निसि दिन पंथ निहारूं पिव को पलक न पल भर लागी रे
पीव-पीव मैं रटूं रात दिन दूजी सुध-बुध भागी रे
बिरह भुजंग मेरो डस्यो कलेजो लहर हलाहल जागी रे
मेरी आरति मेटी गौसांई आय मिलो मोहिं सागी रे
मीरा व्याकुल अति उकलाणी पिया की उमंग अति लागी रे॥

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बसो मेरे नैनण में
बसो मेरे नैनण में नन्दलाल
मोहिनि मूरत सांवरी सूरत नैणा बने बिसाल
अधर सुधारस मूरली राजत उर बैजंती माल
छुद्र घंटिका कटि तट सोभित नूपुर सबद रसाल
मीरा प्रभु संतन सुखदाई भगत बछल गोपाल॥