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11.9.10

अब नाच्यो बहुत गोपाल Ab hon naachyo bahut Gopal

सूरदासजी का यह पद राग धनाश्री में गाया जाता है।
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अब हों नाच्यों बहुत गोपाल
काम क्रोध कौ पहिरि चोलना कण्ठ विषय की माल
महामोह के नूपुर बाजत निंदा सबद रसाल
भरम भर्यो मन भयो पखावज चलत कुसंगति चाल
तृस्ना नाद करत घट भीतर नानाविधि दै ताल
माया कौ कटि फ़ैंटा बांध्यो लोभ तिलक दियो भाल
कोटिक कला काछि दिखरा जल,थल सुधि नहिं काल
सूरदास की सबै अविध्या दूरि करो नंदलाल।
अब हों नाच्यों....

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अब कै माधव मोहिं उधारि

यह पद राग बिलावल में गाया जाता है।

अब कै माधव मोहिं उधारि
मगन  हौं  भाव अम्बुनिधि किरपा सिंधु मुरारि
नीर अति गंभीर माया,लोभ लहरि तरंग
लिये जात अगाध जल में गहे ग्राह अनंग
मीन इन्द्रिय अतिहि काटति मोट अघ सिर भार
पग न इत उत धरन पावत उरझि मोह सिवार
काम क्रोध समेत तृस्ना पवन अति झकझोर
नहिं चितवत देय तियसुत नाम नौका ओर
थक्यो बीच बेहाल बिव्हल सुनहुं करुनामूल
स्याम भुज गहि काढि डारहुं  सूर ब्रज के कूल।

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प्रभु हौं सब पतितन का राजा

यह पद राग सारंग में गाया जाता है।

प्रभु हौं सब पतितन का राजा
पर निंदा मुख पूरि रह्यो जग यह निसान नित बाजा
तृस्ना देसरु सुभट मनोरथ इंद्रिय खडग हमारे
मंत्री कामा कुमत दैवें कों क्रोध रहित प्रतिहारे
गज अहंकार चढ्यो दिग्विजयी लोभ छत्र धरि सीस
फ़ौज असत संगत की मेरी ऐसो हों मैं इस
मोह मदै बंदी गुन गावै  मागध दौष अपार
सूर पाप कों गढ द्रड कीनो मुकम लाय किंवार।

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