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18.10.17

तू आता है सीने मैं जब-जब सांसे भरती हूं,एम.एस.धोनी (2016)

फ़िल्म/एल्बम: एम.एस.धोनी (2016)
संगीतकार: अमाल मलिक
गीतकार: मनोज मुन्तशिर
गायक/गायिका: पलक मुछाल

तू आता है सीने मैं
जब-जब सांसे भरती हूं
तेरे दिल की गलियों से
मैं हर रोज़ गुज़रती हूं
हवा के जैसे चलता है तू
मैं रेत जैसी उड़ती हूं
कौन तुझे यूं प्यार करेगा
जैसे मैं करती हूं

मेरी नज़र का सफर, तुझपे ही आ के रुके
कहने को बाकी है क्या, कहना था जो कह चुके
मेरी निगाहें हैं, तेरी निगाहों पे
तुझे खबर क्या बेखबर
मैं तुझसे ही छुप-छुप कर, तेरी आंखें पढ़ती हूं
कौन तुझे यूं प्यार करेगा…

तू जो मुझे आ मिला, सपने हुए सरफिरे
हाथों में आते नहीं, उड़तें हैं लम्हे मेरे
मेरी हंसी तुझसे, मेरी खुशी तुझसे
तुझे खबर क्या बेक़दर
जिस दिन तुझको ना देखूं, पागल-पागल फिरती हूं
कौन तुझे यूं प्यार करेगा…

16.10.17

तू है संयम की ज्योति तू साहस की ज्वाला

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ 
जय माँ, जय जय माँ जय जय माँ
तू है सैयम की ज्योति तू साहस की ज्वाला तू हो तो ना बच पाए साया कोई काला तू है शक्ति का सागर भर दे मेरा प्याला डर क्या कोई जब तेरा हो तुम रखवाला जय माँ, जय जय माँ जय जय माँ जय माँ शेरावालिये जय माँ, जय माँ जय जय माँ, जय जय माँ संकट हारिये मन था निर्बल तेरा संकल्प अब है ओ माँहेसैन्ये तूने शक्ति को है रख दी आँखों में मेरी है जाम हो रख दी अब नहीं रुकना (जय माता दी) अब नहीं झुकना (जय माता दी) खापर तेरा (जय माता दी) पक्कर मेरा (जय माता दी) हिम्मत तेरी (जय माता दी) ताक़त तेरी (जय माता दी) तू जो बल दे पर्बत चल दे जय माँ, जय जय माँ जय जय माँ जय माँ शेरावालिये जय माँ, जय माँ जय जय माँ, जय जय माँ संकट हारिये [जय माँ, जय जय माँ जय जय माँ 
 ॐ एम ह्रीं क्लिं ॐ एम ह्रीं क्लिं ॐ एम ह्रीं क्लिं भुकाल उठी तड़प ते तुम को थी गूंजेगा संख नाद अंत ही जय माँ, जय जय माँ जय जय माँ जय माँ शेरावालिये जय माँ, जय माँ जय जय माँ, जय जय माँ संकट हारिये मन था निर्बल तेरा संकल्प अब है ओ माँहेसैन्ये 
तूने शक्ति को है रख दी आँखों में मेरी है जाम हो रख दी अब नहीं रुकना (जय माता दी) अब नहीं झुकना (जय माता दी) खापर तेरा (जय माता दी) पक्कर मेरा (जय माता दी) हिम्मत तेरी (जय माता दी) ताक़त तेरी (जय माता दी) तू जो बल दे पर्बत चल दे जय माँ, जय जय माँ जय जय माँ जय माँ शेरावालिये जय माँ, जय माँ जय जय माँ, जय जय माँ संकट हारिये || या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थित नमस् तस्यै नमस् तस्यै नमस् तस्यै नमो नमः ||

15.10.17

झूठा जग रैन बसेरा सांचा दर्द मेरा

Song Title: Naina
 Movie: Dangal 
Singer: Arijit Singh
 Lyrics: Amitabh Bhattacharya
 Music: Pritam
                                 SONG
झूठा जग रैन बसेरा सांचा दर्द मेरा मृग-तृष्णा सा मोह पिया नाता मेरा तेरा नैना.. जो सांझ ख्वाब देखते थे नैना.. बिछड़ के आज रो दिए हैं यूँ नैना.. जो मिलके रात जागते थे नैना.. सेहर में पलकें मीचते हैं यूँ जुदा हुए कदम जिन्होंने ली थी ये कसम मिलके चलेंगे हर्दम अब बांटते हैं ये ग़म भीगे नैना.. जो खिडकियों से हांकते थे नैना.. घुटन में बंद हो गए है यूँ सांस हैरान है मन परेशान है हो रही सी क्यूँ रुआंसा ये मेरी जान है क्यूँ निराशा से है आस हारी हुयी क्यूँ सवालों का उठा सा दिल में तूफ़ान है नैना.. थे आसमान के सितारे नैना.. ग्रहण में आज टूटते हैं यूँ नैना.. कभी जो धुप सेंकते थे नैना.. ठहर के छाओं ढूंढते हैं यूँ जुदा हुए कदम जिन्होंने ली थी ये कसम मिलके चलेंगे हर्दम अब बांटते हैं ये ग़म भीगे नैना.. जो साँझ ख्वाब देखते थे नैना.. बिछड़ के आज रो दिए हैं यूँ

आरती कुंजबिहारी की




आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की
गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला।
श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला।
गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली।
लतन में ठाढ़े बनमाली;
भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक;
ललित छवि श्यामा प्यारी की॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥ x2
कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं।
गगन सों सुमन रासि बरसै;
बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालिन संग;
अतुल रति गोप कुमारी की॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥ x2

14.10.17

जय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी




राग: जंगला ताल


जय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी
अशुभ विदारिणी मात भवानी ।। टेक ।।


आदि शक्ति परब्रह्म स्वरूपिणी
जगजननी चहुँ वेद बखानी ।।१।।
ब्रह्मा शिव हरि अर्चन कीनो
ध्यान धरत सुर नर मुनि ज्ञानी ।।२।।
अष्टभुजा कर खंग बिराजे
सिंह सवार सकल वरदानी ।।३।।
बह्मानंद शरण मे आयो
भव भय नाश करो महारानी ।।४।।

9.10.17

जय महेश जटाजूट कंठ सोहे कालकूट


जय महेश जटाजूट कंठ सोहे कालकूट
राग: ध्रुपद ताल
जय महेश जटाजूट कंठ सोहे कालकूट
जन्म मरण जाए छूट नाम लेत जाके ।१।
तीन नयन चंद्र भाल गल में मुंडन की माल
शोभत तन मिरगछाल कटि में नाग बाके।२।
गौरी बसत सदा संग भस्म लसत अंग अंग
शीश गंग के तरंग वाहन वृषमाके।३।
कर त्रिशूल अरु कुठार बह्मानंद निर्विकार
जाकी महिमा है अपार करत वेद थाके।४।

शंकर तेरी जटा में भाती है गंगधारा

राग: गजल ताल

शंकर तेरी जटा में भाती है गंगधारा
काली घटा के अंदर जिमि दामिनी उजारा ।। टेक।।
गल मुण्डमाल राजे शशि भाल में विराजे
डमरू निनाद बाजे कर में त्रिशूल भारा।।१।।
दृग तीन तेज़ राशि कटि बंध नागफांसी
गिरिजा है संग दासी सब विश्व के अधारा ।।२।।
मृगचर्म वसन धारी वृषराज पे सवारी
निज भक्त दुःख हारी कैलाश में बिहारा।।३।।
शिवनाम जो उचारे सब पाप दोष टारे
बृह्मानंद ना बिसारे भवसिंधु पार तारा।।४।।