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27.11.17

शंकर मेरा प्यारा

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शंकर मेरा प्यारा, शंकर मेरा प्यारा ।
माँ री माँ मुझे मूरत ला दे, शिव शंकर की मूरत ला दे,
मूरत ऐसी जिस के सर से निकले गंगा धरा ॥

माँ री माँ वो डमरू वाला, तन पे पहने मृग की छाला ।
रात मेरे सपनो में आया, आ के मुझ को गले लगाया ।
गले लगा कर मुझ से बोला, मैं हूँ तेरा रखवाला ॥

माँ री माँ वो मेरा स्वामी, मैं उस के पट की अनुगामी ।
वो मेरा है तारण हारा, उस से मेरा जग उजारा ।
है प्रभु मेरा अन्तर्यामी, सब का है वो रखवाला ॥

हे प्रभु मुझे बता दो, चरणों मे कैसे आऊँ


हे प्रभु मुझे बता दो, चरणों मे कैसे आऊँ
माया के झंझटो से, अब मुक्ति कैसे पाऊँ

ना जानु कोई पुजन ,अज्ञ्यानी हुँ मै भगवन
अज्ञ्यानी हुँ मै भगवन, नादान हुँ मै भगवन
करना कृपा दयालू, बंधन से छुट जाऊ
हे प्रभु मुझे बता दो, चरणों मे कैसे आऊँ||१

मैं हुँ पतित पापी, तुम हो पतित पावन
तुम हो पतित पावन, तुम सर्वेश्वर भगवन
अवगुण भरा है मुझमे, कैसे तुम्हे दिखाऊँ
हे प्रभु मुझे बता दो, चरणों मे कैसे आऊँ ||२

रूम झूम करता पधारो मारा भैरूजी,



रूम झूम करता पधारो मारा भैरूजी,
थोरा बालूडा जोवे है थोरी वाट, पधारो मारा भैरूजी
रूम झूम करता..........


मेवा नगर दादा आप विराजो,
थोरी महिमा...(2) है अपरम्पार,
पधारो मारा भैरूजी रूम झूम करता...............


हाथ मे त्रिशुल थोरे खप्पर सोहे,
थोरा डम डम...(2) डमरू आवाज,
पधारो मारा भैरूजी रूम झूम करता...............


मेवा मिठाई थोरे तेल चडे है,
थे तो भक्तो री ...(2) पुरो सब आस,
पधारो मारा भैरूजी रूम झूम करता...............


मेवाड़ ध्यावेह थोने गोडवाड ध्यावेह,
थोने ध्यावेह है...(2) आखो मारवाड़,
पधारो मारा भैरूजी रूम झूम करता...............


नाकोड़ा दरबार दादा थोरे चरने आयो हो
दादा माथा ऊपर ...(2) राखजो हाथ,
पधारो मारा भैरूजी रूम झूम करता...............


रूम झूम करता पधारो मारा भैरूजी,
थोरा बालूडा जोवे है थोरी वाट,
पधारो मारा भैरूजी रूम झूम करता..............

ॐ जय शिव ओंकारा



जय शिव ओंकारा, ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे ।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी ।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

श्वेतांबर पीतांबर बाघंबर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

 

कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूलधारी ।
सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा ।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा ।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला ।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

काशी में विराजे विश्वनाथ, नंदी ब्रह्मचारी ।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

16.10.17

तू है संयम की ज्योति तू साहस की ज्वाला

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ 
जय माँ, जय जय माँ जय जय माँ
तू है सैयम की ज्योति तू साहस की ज्वाला तू हो तो ना बच पाए साया कोई काला तू है शक्ति का सागर भर दे मेरा प्याला डर क्या कोई जब तेरा हो तुम रखवाला जय माँ, जय जय माँ जय जय माँ जय माँ शेरावालिये जय माँ, जय माँ जय जय माँ, जय जय माँ संकट हारिये मन था निर्बल तेरा संकल्प अब है ओ माँहेसैन्ये तूने शक्ति को है रख दी आँखों में मेरी है जाम हो रख दी अब नहीं रुकना (जय माता दी) अब नहीं झुकना (जय माता दी) खापर तेरा (जय माता दी) पक्कर मेरा (जय माता दी) हिम्मत तेरी (जय माता दी) ताक़त तेरी (जय माता दी) तू जो बल दे पर्बत चल दे जय माँ, जय जय माँ जय जय माँ जय माँ शेरावालिये जय माँ, जय माँ जय जय माँ, जय जय माँ संकट हारिये [जय माँ, जय जय माँ जय जय माँ 
 ॐ एम ह्रीं क्लिं ॐ एम ह्रीं क्लिं ॐ एम ह्रीं क्लिं भुकाल उठी तड़प ते तुम को थी गूंजेगा संख नाद अंत ही जय माँ, जय जय माँ जय जय माँ जय माँ शेरावालिये जय माँ, जय माँ जय जय माँ, जय जय माँ संकट हारिये मन था निर्बल तेरा संकल्प अब है ओ माँहेसैन्ये 
तूने शक्ति को है रख दी आँखों में मेरी है जाम हो रख दी अब नहीं रुकना (जय माता दी) अब नहीं झुकना (जय माता दी) खापर तेरा (जय माता दी) पक्कर मेरा (जय माता दी) हिम्मत तेरी (जय माता दी) ताक़त तेरी (जय माता दी) तू जो बल दे पर्बत चल दे जय माँ, जय जय माँ जय जय माँ जय माँ शेरावालिये जय माँ, जय माँ जय जय माँ, जय जय माँ संकट हारिये || या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थित नमस् तस्यै नमस् तस्यै नमस् तस्यै नमो नमः ||

15.10.17

झूठा जग रैन बसेरा सांचा दर्द मेरा

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Song Title: Naina
 Movie: Dangal 
Singer: Arijit Singh
 Lyrics: Amitabh Bhattacharya
 Music: Pritam
                                 SONG
झूठा जग रैन बसेरा सांचा दर्द मेरा 
मृग-तृष्णा सा मोह पिया नाता मेरा तेरा नैना.. 
जो सांझ ख्वाब देखते थे नैना.. 
बिछड़ के आज रो दिए हैं यूँ नैना.. 
जो मिलके रात जागते थे नैना.. 
सेहर में पलकें मीचते हैं यूँ जुदा हुए 
कदम जिन्होंने ली थी ये कसम मिलके चलेंगे हर्दम 
अब बांटते हैं ये ग़म भीगे नैना.. 
जो खिडकियों से हांकते थे नैना.. 
घुटन में बंद हो गए है यूँ सांस हैरान है 
मन परेशान है हो रही सी क्यूँ रुआंसा
 ये मेरी जान है क्यूँ निराशा से है
आस हारी हुयी क्यूँ सवालों का उठा सा दिल में तूफ़ान है नैना.. 
थे आसमान के सितारे नैना.. 
ग्रहण में आज टूटते हैं यूँ नैना.. 
कभी जो धुप सेंकते थे नैना.. 
ठहर के छाओं ढूंढते हैं यूँ जुदा हुए कदम जिन्होंने ली थी ये कसम मिलके चलेंगे हर्दम अब बांटते हैं ये ग़म भीगे नैना.. जो साँझ ख्वाब देखते थे नैना.. 
बिछड़ के आज रो दिए हैं यूँ

आरती कुंजबिहारी की




आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की
गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला।
श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला।
गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली।
लतन में ठाढ़े बनमाली;
भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक;
ललित छवि श्यामा प्यारी की॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥ x2
कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं।
गगन सों सुमन रासि बरसै;
बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालिन संग;
अतुल रति गोप कुमारी की॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥ x2