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अब सौंप दिया इस जीवन का

 अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में।

है जीत तुम्हारे हाथों में, और हार तुम्हारे हाथों में॥

मेरा निश्चय बस एक यही, एक बार तुम्हे पा जाऊं मैं।
अर्पण करदूँ दुनिया भर का सब प्यार तुम्हारे हाथों में॥

जो जग में रहूँ तो ऐसे रहूँ, ज्यों जल में कमल का फूल रहे।
मेरे सब गुण दोष समर्पित हों, करतार तुम्हारे हाथों में॥

यदि मानव का मुझे जनम मिले, तो तव चरणों का पुजारी बनू।
इस पूजक की एक एक रग का हो तार तुम्हारे हाथों में॥

जप जब संसार का कैदी बनू, निष्काम भाव से करम करूँ।
फिर अंत समय में प्राण तजूं, निरंकार तुम्हारे हाथों में॥

मुझ में तुझ में बस भेद यही, मैं नर हूँ तुम नारायण हो।
मैं हूँ संसार के हाथों में, संसार तुम्हारे हाथों में॥

राम सूर्य राम चंद्र राम किरण आस है



राम सूर्य राम चंद्र राम किरण आस है:

राम सूर्य राम चंद्र
राम किरण आस है,
राम धरा राम महीधर,
राम नभ विश्वास है

राम स्वर राम सरगम
राम धुन और ताल है,
राम लय राम गीत,
राम मौन वाचाल है

राम सृष्टि राम बृष्टि
राम ग्रीष्म शीत है,
राम दीप राम ज्योति,
राम शांति गीत है

राम दया राम दुआ
राम लहर चाह है,
राम क्षेम राम आश्रय,
राम अभय राह है

राम योग राम ध्यान
राम मोह प्रीत है,
राम रास राम ज्ञान,
राम सखा मीत है

राम जन्म राम मोक्ष
राम ही आराध्य है,
राम काल राम सृजन
राम रमण साध्य है

रचना आभार : ज्योति नारायण पाठक
वाराणसी

भए प्रगट कृपाला दीनदयाला


 भए प्रगट कृपाला, दीनदयाला,

कौसल्या हितकारी।
हरषित महतारी, मुनि मन हारी,
अद्भुत रूप बिचारी॥

लोचन अभिरामा, तनु घनस्यामा,
निज आयुध भुजचारी।
भूषन बनमाला, नयन बिसाला,
सोभासिंधु खरारी॥

कह दुइ कर जोरी, अस्तुति तोरी,
केहि बिधि करूं अनंता।
माया गुन ग्यानातीत अमाना,
वेद पुरान भनंता॥

करुना सुख सागर, सब गुन आगर,
जेहि गावहिं श्रुति संता।
सो मम हित लागी, जन अनुरागी,
भयउ प्रगट श्रीकंता॥

ब्रह्मांड निकाया, निर्मित माया,
रोम रोम प्रति बेद कहै।
मम उर सो बासी, यह उपहासी,
सुनत धीर मति थिर न रहै॥

उपजा जब ग्याना, प्रभु मुसुकाना,
चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै।
कहि कथा सुहाई, मातु बुझाई,
जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै॥

माता पुनि बोली, सो मति डोली,
तजहु तात यह रूपा।
कीजै सिसुलीला, अति प्रियसीला,
यह सुख परम अनूपा॥

सुनि बचन सुजाना, रोदन ठाना,
होइ बालक सुरभूपा।
यह चरित जे गावहिं, हरिपद पावहिं,
ते न परहिं भवकूपा॥

भए प्रगट कृपाला, दीनदयाला,
कौसल्या हितकारी।
हरषित महतारी, मुनि मन हारी,
अद्भुत रूप बिचारी॥

श्री राम, जय राम, जय जय राम
श्री राम, जय राम, जय जय राम

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली


 अम्बे तू है जगदम्बे काली,

जय दुर्गे खप्पर वाली,
तेर ही गुण गायें भारती,
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ।

तेर भक्त जानो पर मैया भीड़ पड़ी है भारी,
दानव दल पर टूट पड़ो माँ कर के सिंह सवारी ।
सो सो सिंघो से है बलशाली,
है दस भुजाओं वाली,
दुखिओं के दुखड़े निवारती ।

माँ बेटे की है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता,
पूत कपूत सुने है पर ना माता सुनी कुमाता ।
सबपे करुना बरसाने वाली,
अमृत बरसाने वाली,
दुखिओं के दुखड़े निवारती ।

नहीं मांगते धन और दौलत ना चांदी ना सोना,
हम तो मांगे माँ तेरे मन में एक छोटा सा कोना ।
सब की बिगड़ी बनाने वाली,
लाज बचाने वाली,
सतिओं के सत को सवारती ।

गंगा मइयाँ तू सब की पीड़ मिटा देना,


 तेरी निर्मल पावन धार माँ करती सब का उद्धार माँ,

जो आये शरण तू उसको पार लगा देना,
गंगा मइयाँ तू सब की पीड़ मिटा देना,

श्री हरी के चरणों में था तेरा वसेरा मईयां
ब्रह्मा जी ने आज्ञा देके धरा पे उतारा मईयां,
तेरा वेग मियां जी भारी विकराला था,
भोले ने सिर ऊपर तुम को सम्बाला था,
है पाप नाशनी पाँवन हमे बना देना,
गंगा मइयाँ तू सब की पीड़ मिटा देना,

भगी रथ की विनती मानी दिन वरदान माँ,
सगर जी के पुत्रो का किया कल्याण माँ,
आठो ही वस्तुओं का तूने शाप काटा था
पापो को ले तुमने बस प्यार बांटा था,
अमिरत बर्षा कर मियां सदा पीला देना,
गंगा  मइयाँ तू सब की पीड़ मिटा देना,

भारत है देश मेरा ऋषियों की भूमि मईया
राम कृष्ण अर्जुन की यही कर्म भूमि मईयां
आकर के सब तुझमे डुबकी लगा ते है,
रश्मी विसरियाँ भी तेरे गीत गाते है,
हमे अंत समय में अपनी गोद बिठा लेना,
गंगा मइयाँ तू सब की पीड़ मिटा देना,

दो अक्षर का बोल है राम नाम अनमोल है

 


दो अक्षर का बोल है राम नाम अनमोल है,

मन को पावन करने वाला ये अमृत का घोल है
दो अक्षर का बोल है राम नाम अनमोल है,

त्याग तपस्या राम से सीखो और सेवा हनुमान से
राम है मर्यादा पुरशोतम जपो इन्हें समान से
दाम लगे न मोल है राम नाम अनमोल है
दो अक्षर का बोल है राम नाम अनमोल है,

राम नाम सिमरन कर ने से खुले भगती का द्वार है
राम नाम रस पीने वाले होते भव से पार है
मंगल कारी बोल है राम नाम अनमोल है
दो अक्षर का बोल है राम नाम अनमोल है,

रघुनंद है दया के सागर सदा किरपा बरसाते है
विपदा में जब राम हो तो स्वयम दोड कर आते है
हित कारे ये बोल है राम नाम अनमोल है
दो अक्षर का बोल है राम नाम अनमोल है,

तेरो कान्हा बडो हठीलो यमुना तट पे उदम मचावे


 अपने नटखट कान्हा को मैया क्यों न समजावे,

तेरो कान्हा बडो हठीलो यमुना तट पे उदम मचावे,

कान खोल कर सुन ले मैया बिगड़ गया नन्द लाला
कमरे में बंद करके मैया बाहर लगा दे ताला
जब भूखो प्यासों रहेगो दिन भर होश ठिकाने आवे,
तेरो कान्हा बडो हठीलो यमुना तट पे उदम मचावे,

पनघट पे माँ तेरा लाडला करता है बार जोरी
फोड़ दी मटकी कान्हा ने बहियाँ पकड़ मरोड़ी
गारी देकर बोले रे मैया तनिक नही शरमावे
तेरो कान्हा बडो हठीलो यमुना तट पे उदम मचावे,

भीम सेन से पुछो माँ इसकी करतुते सारी,
तेरे कन्हिया से तंग आई सारी ब्रिज की नारी
चीर चुरा के चुपके से ये कदम पे बैठ्यो पावे
तेरो कान्हा बडो हठीलो यमुना तट पे उदम मचावे,

राम का दीवाना वीर हनुमाना



रावण की जिसने लंका जलाई
सीता माता की खोज कराई
असुरो के दल ने तबाही मचाई
सब से ताकतवर राम का सिपाही
जिसकी शक्ति को देवो ने माना भगती जो जाना राम ने पहचाना
वो है राम का दीवाना वीर हनुमाना
वीर हनुमाना अति बलवाना

बचपन में सूरज निघला इन्दर का घमंड निघला
शंकर ने ज्ञान दिया ब्रह्मा ने वरदान दिया
अक्षय कुमार से भी वो लड़ा था
सूरा से भी ज्यदा वो बड़ा था
मेघनाथ से बिड के गजब कर दियां
वो है राम का दीवाना वीर हनुमाना
वीर हनुमाना अति बलवाना

समन्दर को लांघ दिया माता को अंगूठी दिया,
लखन को संजीवन किया रावन को मार दिया ,
भिभ्शन ने उसको ताना जब मारा
बजरंग बलि का फिर चढ़ गया पारा
सीना चीर के सिया राम दिखला दिया
वो है राम का दीवाना वीर हनुमाना
वीर हनुमाना अति बलवाना

नाथ ! कैसे नरसिंह रूप बनाया!


 भजन: नाथ ! कैसे नरसिंह रूप बनाया!

राग: बरहंस ताल धमाल


नाथ ! कैसे नरसिंह रूप बनाया!
जासे भक्त प्रह्लाद बचाया ।।टेक।।

न कोई तुम्हरा पिता कहावे, न कोई जननी जाया
थंभ फोड़कर प्रकट भये हरि, यह अचरज तेरी माया ।।१।।

आधा रूप धरा प्रभु नर का, आधा सिंह सुहाया
हिरण्यकशिपु को पकड़ धरण में, नख से फाड़ गिराया ।।२।।

गर्जन सुनकर देवलोक से, ब्रह्मादिक सब आया
हाथ जोड़ कर विनती कीनी, शांत स्वरूप कराया ।।३।।

अन्तर्यामी सर्वव्यापक, ईश्वर वेद बताया
ब्रह्मानंद सत्यकर सबको, यह परमाण दिखाया ।।४।।

चलना है दूर मुसाफिर

 


चलना है दूर मुसाफिर,काहे सोवे रे,

काहे सोवे रे..मुसाफिर! काहे सोवे रे,

चेत-अचेत नर सोच बावरे,
बहुत नींद मत सोवे रे,
काम-क्रोध-मद-लोभ में फंसकर
उमरिया काहे खोवे रे,
चलना है दूर मुसाफिर,काहे सोवे रे |

सिर पर माया मोह की गठरी,
संग दूत तेरे होवे रे,
सो गठरी तोरी बीच में छिन गई,
मूंड पकड़ कहाँ रोवे रे,
चलना है दूर मुसाफिर,काहे सोवे रे |

रस्ता तो दूर कठिन है,
चल अब अकेला होवे रे,
संग साथ तेरे कोई ना चलेगा,
काके डगरिया जोवे रे,
चलना है दूर मुसाफिर,काहे सोवे रे |

नदिया गहरी,नांव पुरानी,
केही विधि पार तू होवे रे,
कहे कबीर सुनो भाई साधो,
ब्याज धो के मूल मत खोवे रे,
चलना है दूर मुसाफिर,काहे सोवे रे |

रचयिता - कबीर दास