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Friday, April 28, 2017

जहाँ विराजे विष्णु के अवतारी गंगाराम



आशीर्वाद दिवस उत्सव हम चले झुंझनू धाम,
जहाँ विराजे विष्णु के अवतारी गंगाराम ।

गंगाराम अमृतवाणी का करेंगे मिलकर पाठ,
पंचदेव मंदिर में होगी भजनों की बरसात,
सेवा समिति ने कर रखा है पूरा इंतज़ाम,
जहाँ विराजे विष्णु के अवतारी गंगाराम ।

बैशाख बदी चतुर्थी का दिन भक्तों का कल्याण किया,
हाँथ उठा कर भक्त शिरोमणि ने मंगल आशीष दिया,
चमत्कार को नमस्कार हम करते कोटि प्रणाम,
जहाँ विराजे विष्णु के अवतारी गंगाराम ।

भक्त शिरोमणि देवकीनंदन की समाधी को करके नमन,
सौरभ मधुकर मंदिर की रज माथे पर करके धारण,
कलिमलहारी की महिमा का करेंगे हम गुणगान,
जहाँ विराजे विष्णु के अवतारी गंगाराम ।

आशीर्वाद दिवस उत्सव हम चले झुंझनू धाम,
जहाँ विराजे विष्णु के अवतारी गंगाराम ।

त्रिशूल रूप धारिणीम , झुंझुनू निवासिनीम



त्रिशूल रूप धारिणीम , झुंझुनू निवासिनीम ,
महासती नारायणीम , नमामि सत-शिरोमणिम ।

रण प्रियाम बिरांग नाम गुर सहाय नन्दिनीम ,
सौभद्र-वाम अंगिनीम , नमामि सत-शिरोमणिम ।
त्रिशूल रूप धारिणीम , झुंझुनू निवासिनीम ,
महासती नारायणीम , नमामि सत-शिरोमणिम ।

भक्त-वतसलाम सतिम , स्वास्ति रूप धारिणीम ।
सौभाग्य-वर प्रदायनीम , नमामि सत-शिरोमणिम ।
त्रिशूल रूप धारिणीम , झुंझुनू निवासिनीम ,
महासती नारायणीम , नमामि सत-शिरोमणिम ।

गोयल सुताम , पति व्रताम , यवन दल विनाशिनीम ,
शत्रु-दाल विदारिणीम , नमामि सत-शिरोमणिम ।
त्रिशूल रूप धारिणीम , झुंझुनू निवासिनीम ,
महासती नारायणीम , नमामि सत-शिरोमणिम ।

त्रिशूल रूप धारिणीम , झुंझुनू निवासिनीम ,
महासती नारायणीम , नमामि सत-शिरोमणिम ।

Thursday, April 27, 2017

राम नाम जपने वाले को राम मिलेगा


राम नाम जपने वाले को राम मिलेगा,
राम नाम जपने वाले को राम मिलेगा,
राम मिलेगा, उसे राम का धाम मिलेगा,
राम मिलेगा, उसे राम का धाम मिलेगा..

राम नाम जपने वाले को राम मिलेगा,
राम मिलेगा, उसे राम का धाम मिलेगा,
राम मिलेगा, उसे राम का धाम मिलेगा..
राम धाम में दिव्य शांति विश्राम मिलेगा,
राम धाम में दिव्य शांति विश्राम मिलेगा,
राम मिलेगा, राम मिलेगा,
राम नाम जपने वाले को राम मिलेगा,
राम मिलेगा, उसे राम का धाम मिलेगा,
राम मिलेगा, उसे राम का धाम मिलेगा..

राम ब्रह्म हैं, चिन्मय हैं, अविनाशी हैं,
राम ब्रह्म हैं, चिन्मय हैं, अविनाशी हैं,
सर्वरहित हैं, लेकिन घट-घट वासी हैं,
सर्वरहित हैं, लेकिन घट-घट वासी हैं,
जो ये नाम जपेगा, उसको राम मिलेगा,
जो ये नाम जपेगा, उसको राम मिलेगा..
राम नाम जपने वाले को राम मिलेगा,
राम मिलेगा, उसे राम का धाम मिलेगा,
राम मिलेगा, उसे राम का धाम मिलेगा..

राम नाम जपते जपते सब कर्म करो जी,
राम नाम जपते जपते सब कर्म करो जी,
राम नाम जपने में न कोई शर्म करो जी,
राम नाम जपने में न कोई शर्म करो जी,

सत्य नाँव पर चढ़ो, साथ में राम चढ़ेगा, हो...
सत्य नाँव पर चढ़ो, साथ में राम चढ़ेगा, हो...
साथ में राम चढ़ेगा, हो... ओ...
सत्य नाँव पर चढ़ो, साथ में राम चढ़ेगा,
नहीं डूबने देगा,
नहीं डूबने देगा, भव नद पार करेगा..
राम नाम जपने वाले को राम मिलेगा,
राम मिलेगा, उसे राम का धाम मिलेगा,
राम मिलेगा, उसे राम का धाम मिलेगा..

राम नाम में निहित मन्त्र की शक्ति है,
राम नाम में निहित मन्त्र की शक्ति है,
राम नाम जपने से कृपा बरसती है,
राम नाम जपने से कृपा बरसती है,
कृपा वृष्टि में भींगो, कृपा वृष्टि में भींगो, भाई,
कृपा वृष्टि में भींगो, कृपा वृष्टि में भींगो,
कृपा वृष्टि में भींगो, भींगो, भींगो, भींगो,
कृपा वृष्टि में भींगो, मन का मैल धुलेगा,
कृपा वृष्टि में भींगो, मन का मैल धुलेगा,
मैल धुलेगा, नाम भक्ति का रंग चढ़ेगा,
मैल धुलेगा, नाम भक्ति का रंग चढ़ेगा..
राम नाम जपने वाले को राम मिलेगा, हो...
राम मिलेगा, उसे राम का धाम मिलेगा,
राम नाम जपने वाले को राम मिलेगा, हो...
राम मिलेगा, उसे राम का धाम मिलेगा,
राम धाम में दिव्य शांति विश्राम मिलेगा,
राम धाम में दिव्य शांति विश्राम मिलेगा,
राम नाम जपने वाले को राम मिलेगा, हो...
राम मिलेगा, उसे राम का धाम मिलेगा ..

रहे जनम जनम तेरा ध्यान, यही वर दो मेरे राम

अर्थ न धर्म न काम रुचि, पद न चहहुं निरवान |
जनम जनम रति राम पद, यह वरदान न आन ||

रहे जनम जनम तेरा ध्यान, यही वर दो मेरे राम
सिमरूँ निश दिन हरि नाम, यही वर दो मेरे राम ।
रहे जनम जनम तेरा ध्यान, यही वर दो मेरे राम ॥
मेरे राम, मेरे राम, मेरे राम, मेरे राम ।

मन मोहन छवि नैन निहारे, जिह्वा मधुर नाम उच्चारे,
कनक भवन होवै मन मेरा, जिसमें हो श्री राम बसेरा, or
कनक भवन होवै मन मेरा, तन कोसलपुर धाम,
यही वर दो मेरे राम |
रहे जनम जनम तेरा ध्यान, यही वर दो मेरे राम ॥

सौंपूं तुझको निज तन मन धन, अरपन कर दूं सारा जीवन,
हर लो माया का आकर्षण, प्रेम भगति दो दान,
यही वर दो मेरे राम |
रहे जनम जनम तेरा ध्यान, यही वर दो मेरे राम ॥

गुरु आज्ञा ना कभी भुलाऊँ, परम पुनीत राम गुन गाऊँ,
सिमरन ध्यान सदा कर पाऊँ, दृढ़ निश्चय दो राम !
यही वर दो मेरे राम,
रहे जनम जनम तेरा ध्यान, यही वर दो मेरे राम ॥

संचित प्रारब्धों की चादर, धोऊं सतसंगों में आकर,
तेरे शब्द धुनों में गाकर, पाऊं मैं विश्राम,
यही वर दो मेरे राम |
रहे जनम जनम तेरा ध्यान, यही वर दो मेरे राम ॥

हे दयामय आप ही संसार के आधार हो

हे दयामय आप ही संसार के आधार हो |
आप ही करतार हो हम सबके पालनहार हो ||

जन्म दाता आप ही माता पिता भगवान हो |
सर्व सुख दाता सखा भ्राता हो तन धन प्राण हो ||

आपके उपकार का हम ऋण चुका सकते नहीं |
बिन कृपा के शांति सुखका सार पा सकते नहीं ||

दीजिये वह मति बने हम सदगुणी संसार में |
मन हो मंजुल धर्मं मय और तन लगे उपकार में ||

हे दयामय आपका हमको सदा आधार हो |
आपके भक्तों से ही भरपूर यह परिवार हो ||

छोड़ देवें काम को और क्रोध को मद लोभ को |
शुद्ध और निर्मल हमारा सर्वदा आचार हो |

प्रेम से मिल मिल के सारे गीत गायें आपके |
मन में बहता आपका ही प्रेम पारावार हो ||

जय पिता जय जय पिता, हम जय तुम्हारी गा रहे ||
रात दिन घर में हमारे आपकी जयकार हो ||

धन धान्य घर में जो सभी कुछ, आप का ही है दिया |
उसके लिये प्रभु आपको धन्यवाद सौ सौ बार हो ||

Saturday, March 25, 2017

अधरों पे जा सजी है कन्हैया तेरी ये वंशी



अधरों पे जा सजी है कन्हैया तेरी ये वंशी.
ये तान दे निराली बजैया तेरी ये वंशी.
हम सबको बाँधती है तेरी राह और डगर पे-
अब मन नहीं है बस में बसैया तेरी ये वंशी..

ये प्रेम तो अमर है राधा किशन से जग में.
सब लोग दिख रहे है इसमें मगन से जग में.
माहौल प्यार का ये कुदरत तभी बनाये-
जब मन करे समर्पित खुद को बदन से जग में..

दिल हो कदम्ब डाली और मुरली बज रही हो.
उसमें भी छवि तुम्हारी दर्पण में सज रही हो.
मन मेरा बन के राधा पहलू में हो तुम्हारे-
जीवन सफल हो काया सब मोह तज रही हो ..

तेरे बस में ये जहाँ है हम सब तेरे शरण में.
बस भक्ति तेरी चाहें झुकते तेरे चरण में.
गर दिल लगे भटकने हमें राह पर लगाना-

Sunday, October 16, 2016

रामायण के चौपाई -मंत्र Ramayan Chopai mantra



रामायण की चौपाई से जीवन के कुछ महत्वपूर्ण मंत्र ! यदि आप इन मंत्रो का अपने जीवन मे प्रयोग करेंगे तो प्रभु श्री राम आप के जीवन को सुखमय बना देगे !!

रक्षा के लिए
मामभिरक्षक रघुकुल नायक ! घृत वर चाप रुचिर कर सायक !!

विपत्ति दूर करने के लिए
राजिव नयन धरे धनु सायक ! भक्त विपत्ति भंजन सुखदायक !!

सहायता के लिए
मोरे हित हरि सम नहि कोऊ ! एहि अवसर सहाय सोई होऊ !!
सब काम बनाने के लिए
वंदौ बाल रुप सोई रामू ! सब सिधि सुलभ जपत जोहि नामू !!
वश मे करने के लिए
सुमिर पवन सुत पावन नामू ! अपने वश कर राखे राम !!
संकट से बचने के लिए
दीन दयालु विरद संभारी ! हरहु नाथ मम संकट भारी !!
विघ्न विनाश के लिए
सकल विघ्न व्यापहि नहि तेही ! राम सुकृपा बिलोकहि जेहि !
रोग विनाश के लिए
राम कृपा नाशहि सव रोगा ! जो यहि भाँति बनहि संयोगा !!
ज्वर ताप दूर करने के लिए
 दैहिक दैविक भोतिक तापा ! राम राज्य नहि काहुहि व्यापा !!
दुःख नाश के लिए 
राम भक्ति मणि उस बस जाके ! दुःख लवलेस न सपनेहु ताके !!
खोई चीज पाने के लिए 


गई बहोरि गरीब नेवाजू ! सरल सबल साहिब रघुराजू !!
अनुराग बढाने के लिए 
सीता राम चरण रत मोरे ! अनुदिन बढे अनुग्रह तोरे !!
घर मे सुख लाने के लिए
 जै सकाम नर सुनहि जे गावहि ! सुख सम्पत्ति नाना विधि पावहिं !!
सुधार करने के लिए
मोहि सुधारहि सोई सब भाँती ! जासु कृपा नहि कृपा अघाती ! 
विद्या पाने के लिए
गुरू गृह पढन गए रघुराई ! अल्प काल विधा सब आई !!
सरस्वती निवास के लिए
जेहि पर कृपा करहि जन जानी ! कवि उर अजिर नचावहि बानी !!
निर्मल बुध्दि के लिए
ताके युग पदं कमल मनाऊँ ! जासु कृपा निर्मल मति पाऊँ !!
मोह नाश के लिए
होय विवेक मोह भ्रम भागा ! तब रघुनाथ चरण अनुरागा !!
प्रेम बढाने के लिए
सब नर करहिं परस्पर प्रीती ! चलत स्वधर्म कीरत श्रुति रीती !!
प्रीती बढाने के लिए
बैर न कर काह सन कोई ! जासन बैर प्रीति कर सोई !!
सुख प्रप्ति के लिए
अनुजन संयुत भोजन करही ! देखि सकल जननी सुख भरहीं !!
भाई का प्रेम पाने के लिए
सेवाहि सानुकूल सब भाई ! राम चरण रति अति अधिकाई !!
बैर दूर करने के लिए
 बैर न कर काहू सन कोई ! राम प्रताप विषमता खोई !!
मेल कराने के लिए 


गरल सुधा रिपु करही मिलाई ! गोपद सिंधु अनल सितलाई !!
शत्रु नाश के लिए
जाके सुमिरन ते रिपु नासा ! नाम शत्रुघ्न वेद प्रकाशा !!
रोजगार पाने के लिए
विश्व भरण पोषण करि जोई ! ताकर नाम भरत अस होई !!
 इच्छा पूरी करने के लिए
राम सदा सेवक रूचि राखी ! वेद पुराण साधु सुर साखी !!
पाप विनाश के लिए
पापी जाकर नाम सुमिरहीं ! अति अपार भव भवसागर तरहीं !!
अल्प मृत्यु न होने के लिए
अल्प मृत्यु नहि कबजिहूँ पीरा ! सब सुन्दर सब निरूज शरीरा !!
दरिद्रता दूर के लिए 
नहि दरिद्र कोऊ दुःखी न दीना ! नहि कोऊ अबुध न लक्षण हीना !!
प्रभु दर्शन पाने के लिए
अतिशय प्रीति देख रघुवीरा ! प्रकटे ह्रदय हरण भव पीरा !!
शोक दूर करने के लिए
नयन बन्त रघुपतहिं बिलोकी ! आए जन्म फल होहिं विशोकी !!
क्षमा माँगने के लिए
अनुचित बहुत कहहूँ अज्ञाता ! क्षमहुँ क्षमा मन्दिर दोऊ भ्राता !