http://feeds.feedburner.com/blogspot/GKoTZ

Tuesday, June 20, 2017

राम कहानी सुनो रे राम कहानी


राम कहानी सुनो रे राम कहानी
कहत सुनत आवे आँखों में पानी

श्री राम जय जय राम

दशरथ के राज दुलारे, कौशल्या की आँख के तारे
वे सूर्य वंश के सूरज, वे रघुकुल के उज्जयारे
राजीव नयन बोलें मधुभरी वाणी
राम कहानी सुनो रे राम कहानी...

 

शिव धनुष भंग प्रभु करके, ले आए सीता वर के
घर त्याग भये वनवासी, पित की आज्ञा सर धर के
लखन सिया ले संग, छोड़ी रजधानी
राम कहानी सुनो रे राम कहानी...

खल भेष भिक्षु धर के, भिक्षा का आग्रह करके
उस जनक सुता सीता को, छल बल से ले गया हर के
बड़ा दुःख पावे राजा राम जी की रानी
राम कहानी सुनो रे राम कहानी...

श्री राम ने मोहे पठायो, मैं राम दूत बन आयो
सीता माँ की सेवा में रघुवर को संदेसा लायो
और संग लायो प्रभु मुद्रिका निसानी
राम कहानी सुनो रे राम कहानी...

राम का नाम लेकर जो मर जायेंगे


महल चौबारे तेरे साथ नहीं जायेंगे।
अपने पराये तेरे साथ नहीं जायेंगे।
जाये नेक कमाई तेरे साथ बन्दया।

राम का नाम लेकर जो मर जायेंगे,
वो अमर नाम दुनिया में कर जायेंगे।

ये न पूछो की मर कर किधर जायेंगे,
वो जिधर भेज देंगे उधर जायेंगे।
राम का नाम लेकर...

राजा राम राम राम सीता राम राम राम ॥

 

टूट जाए न माला हरी नाम की,
वरना अनमोल मोती बिखर जायेंगे ।
राम का नाम लेकर...

राम नाम की बेड़ी पे होकर सवार,
भव सागर से प्यारे हम तर जायेंगे।
राम का नाम लेकर...

आप मानो न मानो ख़ुशी आपकी,
हम मुसाफिर है कल अपने घर जायेंगे।
राम का नाम लेकर...

Sunday, June 4, 2017

रहे जनम जनम तेरा ध्यान, यही वर दो मेरे राम - भजन

अर्थ न धर्म न काम रुचि, पद न चहहुं निरवान |
जनम जनम रति राम पद, यह वरदान न आन ||

रहे जनम जनम तेरा ध्यान, यही वर दो मेरे राम
सिमरूँ निश दिन हरि नाम, यही वर दो मेरे राम ।
रहे जनम जनम तेरा ध्यान, यही वर दो मेरे राम ॥
मेरे राम, मेरे राम, मेरे राम, मेरे राम ।

मन मोहन छवि नैन निहारे, जिह्वा मधुर नाम उच्चारे,
कनक भवन होवै मन मेरा, जिसमें हो श्री राम बसेरा, or
कनक भवन होवै मन मेरा, तन कोसलपुर धाम,
यही वर दो मेरे राम |
रहे जनम जनम तेरा ध्यान, यही वर दो मेरे राम ॥

सौंपूं तुझको निज तन मन धन, अरपन कर दूं सारा जीवन,
हर लो माया का आकर्षण, प्रेम भगति दो दान,
यही वर दो मेरे राम |
रहे जनम जनम तेरा ध्यान, यही वर दो मेरे राम ॥

गुरु आज्ञा ना कभी भुलाऊँ, परम पुनीत राम गुन गाऊँ,
सिमरन ध्यान सदा कर पाऊँ, दृढ़ निश्चय दो राम !
यही वर दो मेरे राम,
रहे जनम जनम तेरा ध्यान, यही वर दो मेरे राम ॥

संचित प्रारब्धों की चादर, धोऊं सतसंगों में आकर,
तेरे शब्द धुनों में गाकर, पाऊं मैं विश्राम,
यही वर दो मेरे राम |
रहे जनम जनम तेरा ध्यान, यही वर दो मेरे राम ॥

Tuesday, May 30, 2017

नैहरवा हमका न भावे- कबीरदास

कबीर दास जी की अति सारगर्भित रचना

नैहरवा हमका न भावे !!

साई की नगरी परम् अति सुंदर जहाँ कोई जान न पावे !
चाँद सूरज जहाँ पवन न पानी, को सन्देश पहुचावे !
दर्द ये साईं को सुनावे .. .!! टेक !!

आगे चलों पन्थ नही सूझे, पीछे दोष लगावे
केहि विधि ससुरे जाऊं मोरि सजनी बिरहा जोर जरावे>बिनु सद्गुरु अपनों नहीं कोऊ जो ये राह बतावे !
कहत कबीर सुनो भाई साधो सुपनन पीतम पावे !
तपन जो जिय की बुझावे .. !! टेक !!
दुल्हनिया है "जीवात्मा" और दुलहा हैं "परमात्मा"
"जीव" को उसका मायका अथवा "यह संसार" तनिक भी नहीं भाता !

मानव परिवेश में बंधा जीवात्मा बेचैन है ! वह शीघ्रातिशीघ्र अपने स्थाई निवास स्थान अथवा परमपिता परमेश्वर की नगरी - उसकी सुसराल पहुंचना चाहता है !

श्री हनुमान चालीसा


श्री हनुमान चालीसा
श्री राम जय राम जय जय दयालु ।
श्री राम जय राम जय जय कृपालु ॥

अतुलित बल धामं हेम शैलाभ देहम्‌ ।
दनुज वन कृषाणं ज्ञानिनां अग्रगणयम्‌ ।
सकल गुण निधानं वानराणामधीशम्‌ ।
रघुपति प्रियभक्तं वातजातं नमामि ॥

श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि ।
वरनऊँ रघुवर विमल जसु, जो दायकु फल चारि ॥
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरो पवन कुमार ।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार ॥

हमारे रामजी से राम राम, कहियो जी हनुमान ,
कहियो जी हनुमान , कहियो जी हनुमान ॥

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥
राम दूत अतुलित बल धामा । अंजनिपुत्र पवन सुत नामा ॥
महावीर बिक्रम बजरंगी । कुमति निवार सुमिति के संगी ॥
कंचन वरन विराज सुवेसा । कानन कुंडल कुंचित केसा ॥
हाथ बज्र औ ध्वजा विराजै । काँधे मूँज जनेऊ साजै ॥
शंकर सुवन केसरीनंदन । तेज प्रताप महा जग बंदन ॥
विद्यावान गुनी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ॥

हमारे रामजी से राम राम, कहियो जी हनुमान ,
कहियो जी हनुमान, कहियो जी हनुमान ॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहि देखावा । बिकट रूप धरि लंक जरावा ॥
भीम रूप धरि असुर सँहारे । रामचंन्द्र के काज सँवारे ॥
लाय सजीवन लखन जियाये । श्री रघुबीर हरषि उर लाये ॥
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई । तुम मम प्रिय भरत सम भाई ॥
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं । अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा । नारद सारद सहित अहीसा ॥
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते । कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा । राम मिलाय राज पद दीन्हा ॥

हमारे रामजी से राम राम, कहियो जी हनुमान ,
कहियो जी हनुमान , कहियो जी हनुमान ॥

तुम्हरो मंत्र विभीषन माना । लंकेश्वर भये सब जग जाना ॥
जुग सहस्त्र जोजन पर भानू । लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं । जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥
दु्र्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥
राम दुआरे तुम रखवारे । होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥
 

सब सुख लहैं तुम्हारी सरना । तुम रच्छक काहू को डर ना ॥
आपन तेज सम्हारो आपै । तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥
भूत पिसाच निकट नहिं आवै । महावीर जब नाम सुनावैं ॥

हमारे रामजी से राम राम, कहियो जी हनुमान ,
कहियो जी हनुमान , कहियो जी हनुमान ॥

नासै रोग हरै सब पीरा । जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥
संकट तें हनुमान छुड़ावै । मन क्रम वचन ध्यान जो लावै ॥
सब पर राम तपस्वीं राजा । तिन के काज सकल तुम साजा ॥
और मनोरथ जो कोइ लावै । तासु अमित जीवन फल पावै ॥
चारों जुग परताप तुम्हारा । है परसिद्ध जगत उजियारा ॥
साधु संत के तुम रखबारे । असुर निकंदन राम दुलारे ॥
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता । अस बर दीन जानकी माता ॥
राम रसायन तुम्हरे पासा । सदा रहो रघुपति के दासा ॥

हमारे रामजी से राम राम, कहियो जी हनुमान ,
कहियो जी हनुमान , कहियो जी हनुमान ॥

तुम्हरे भजन राम को पावै । जनम जनम के दुख बिसरावै ॥
अंत काल रघुबर पुर जाई । जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई ॥
और देवता चित्त न धरई । हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥
संकट कटै मिटै सब पीरा । जो सुमिरैं हनुमत बलबीरा ॥
जै जै जै हनुमान गोसाईं । कृपा करहु गुरू देव की नाईं ॥
जो शत बार पाठ कर कोई । छूटे बंदि महा सुख होई ॥
जो यह पढै हनुमान चलीसा । होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा । कीजै नाथ हृदय मँह डेरा ॥

हमारे रामजी से राम राम, कहियो जी हनुमान ,
कहियो जी हनुमान , कहियो जी हनुमान ॥

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रुप ।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ॥

श्री राम जय राम जय जय राम ।

बालापन का याराना तेरा ओर कृष्ण मुरारी का

बालापन का याराना तेरा ओर कृष्ण मुरारी का।
उसके डोरे चला जा वो, फर्ज निभा दे यारी का॥

कैई -2 दिन तक टूक मिले ना, कसर रही ना टोटे में
क्या भूखा ही मरना लिखा है भाग हमारे खोटे में॥
यारे प्यारे सभी सहारे,जाके टूट पिसोटे में,
रहना और नही बसकी अब तेरे या दुख मोठे में॥
तेरे लेके मरु या जीऊं, ख्याल नही तने नारी का -उसके डोरे ....

ओर ने दीपक करे चादना, अपने करे अंधेरा सै
तेरा यार द्वारका बाला तनै नही कुछ बेरा सै॥
उसके पास चला जा साजन कहा मान ले मेरा सै
तेरा उसका प्रेम घना वो दुख मेटेगा तेरा सै॥
करना चाहिए तनै भरोसा, अपने उस गिरधारी का-उसके डोरे ....

गुरुकुल में तुम साथ पड़े ओर बचपन साथ गबाया था
शिक्षा पूरी करी तने जब टेम विदा का आया था॥
प्रेम में आँसू उमड़ रहा ओर मोह गात में छाया था
कोली भरके कृष्ण जी ने फिर तुमको समझाया था॥
कभी टाइम पे आ जाइये- दउ काट फंद बीमारी का-उसके....

मात पिता ओर सतगुर के घर कभी ना सरमाना चाइये
दुख बिपता में यार के डोरे बेखटके जाना चाहिए॥
धीरज धर्म मित्र नारी को टेम पे अजमाना चाहिए
मेरे कहे ते कृष्ण जी के तने पास जाना चाहिए॥
बैंसलात में गॉव बडौली हरेराम प्रेचारी का-उसके डोरे चला जा वो
फर्ज निभा दे यारी का॥

Friday, April 28, 2017

जहाँ विराजे विष्णु के अवतारी गंगाराम



आशीर्वाद दिवस उत्सव हम चले झुंझनू धाम,
जहाँ विराजे विष्णु के अवतारी गंगाराम ।

गंगाराम अमृतवाणी का करेंगे मिलकर पाठ,
पंचदेव मंदिर में होगी भजनों की बरसात,
सेवा समिति ने कर रखा है पूरा इंतज़ाम,
जहाँ विराजे विष्णु के अवतारी गंगाराम ।

बैशाख बदी चतुर्थी का दिन भक्तों का कल्याण किया,
हाँथ उठा कर भक्त शिरोमणि ने मंगल आशीष दिया,
चमत्कार को नमस्कार हम करते कोटि प्रणाम,
जहाँ विराजे विष्णु के अवतारी गंगाराम ।

भक्त शिरोमणि देवकीनंदन की समाधी को करके नमन,
सौरभ मधुकर मंदिर की रज माथे पर करके धारण,
कलिमलहारी की महिमा का करेंगे हम गुणगान,
जहाँ विराजे विष्णु के अवतारी गंगाराम ।

आशीर्वाद दिवस उत्सव हम चले झुंझनू धाम,
जहाँ विराजे विष्णु के अवतारी गंगाराम ।